ख़ुद को साबित करने के लिए चुप रहो – तुम्हारी मेहनत एक दिन बोल उठेगी
ख़ुद को साबित करने के लिए चुप रहो – तुम्हारी मेहनत एक दिन बोल उठेगी प्रस्तावना आज की दुनिया में हर कोई कुछ न कुछ साबित करना चाहता है — अपने परिवार को, दोस्तों को, रिश्तेदारों को, समाज को… लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप बार-बार खुद को शब्दों से साबित करने लगते हैं, तो लोग आपको हल्के में लेने लगते हैं? असल पहचान शब्दों से नहीं होती – मेहनत से होती है। चुप रहो, अपने सपनों पर काम करते रहो — एक दिन तुम्हारा काम इतना बोलता है कि दुनिया चुप हो जाती है। 1. हर बार सफाई देना क्यों ज़रूरी नहीं जब हम बार-बार दूसरों को बताते हैं कि हम क्या हैं, क्या कर सकते हैं, कितने मेहनती हैं — तो लोग हमें सीरियस लेना बंद कर देते हैं। 🧠 सच्चाई: “जो लोग हर बात पर खुद को साबित करते हैं, उन्हें लोग ज़रूरत से ज्यादा जज करते हैं।” 🔕 इसलिए जरूरी है कि: चुप रहो अपने काम पर ध्यान दो नतीजे खुद बोले 2. दुनिया नतीजे देखना चाहती है, प्रोमिस नहीं आज के दौर में सबके पास कहने के लिए बातें हैं — “मैं ये करूंगा”, “मैं वो बनूंगा”… लेकिन लोग सुनना नहीं चाहते, वो देखना चाहते हैं। 🧩 Reality C...